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अब नही होगा ग्रामीण का शहरों की ओर पलायन, विकास का बदला रुख

असली भारत गांवों में ही बसता है जिसमें देश की करीब 70 फीसद # आबादी रहती है। पिछले कुछ वर्षो से देश में #शहरीकरण बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। रोजी-रोटी के बेहतर अवसरों की वजह से ग्रामीण शहरों की ओर #पलायन कर रहे हैं। लेकिन इस रुख में अब बदलाव आ रहा है। सरकार की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी उज्ज्वला, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत और सौभाग्य जैसी योजनाओं से #ग्रामीणों के लिए उत्प्रेरक का काम कर रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र की प्रति व्यक्ति आय में अच्छा इजाफा देखने को मिला है।#बुनियादी सुविधाएं बढ़ने से विकास की धारा शहरों से होते हुए अब गांवों की ओर रुख कर रही है। शहरीकरण की चमक बढ़ने के बावजूद वर्ष तक 2050 देश की ग्रामीण क्षेत्र की आबादी 50 फीसद के स्तर पर बनी रहेगी। दरअसल, भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार है जहां ग्रामीण और #शहरी क्षेत्र में भारी अंतर है। शहरी क्षेत्र देश के प्रगतिशील और विकासशील समाज का प्रतिनिधित्व करता है। इस क्षेत्र का राष्ट्रीय आय में 55 फीसद का योगदान है जबिक ग्रामीण क्षेत्र पिछड़े और #आदिवासी समाज को दर्शाता है जो गरीबी में जीवनयापन कर रही है। देश की यह दोहरी अर्थव्यवस्था समग्र विकास और इसके पांच खरब डालर के बनने की राह बड़ी बाधा साबित हो रही है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के विकास में तेजी लाकर गांव और शहर के बीच की खाई को जल्द से जल्द पाटने की जरूरत है। इसके बिना भारत के #विकसित देश बनने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा।

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